अंतरजाल पर देव बाबा का चिट्ठा…

लोकतंत्र में नायक बदलते रहते हैं, और नायकों के सत्ता से उतरते ही सबसे तेजी से बदलते हैं हमारे समाज के स्वघोषित “बुद्धिजीवियों” के सुर। पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों अवसरवादिता और बौद्धिक पाखंड का सबसे सटीक उदाहरण बनी हुई है।

याद कीजिए पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे! जब परिणामों के तुरंत बाद ममता बनर्जी के गुंडों द्वारा राजनीतिक हिंसा का नंगा नाच किया जा रहा था, तब यही तथाकथित ‘भद्रलोक’ के बुद्धिजीवी उस हिंसा को अलग-अलग नैरेटिव सेट करके ‘जस्टिफाई’ करने में लगे थे। उस समय इनकी कलम और जुबान दोनों ने चुप्पी साध ली थी। और आज? आज जब हवा का रुख बदल गया है, तो यही लोग ममता बनर्जी की बुराई करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सच मानिए, भद्रलोक के इन बुद्धिजीवियों का पाखंड एक अलग ही लेवल का होता है।

मुझे अपना एक पुराना वाकया याद आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद, मैंने एक बंगाली बुद्धिजीवी से बंगालियों के वोटिंग पैटर्न पर एक एकदम सीधा और तार्किक प्रश्न पूछा था। अपनी राजनीतिक पसंद को सही ठहराने के लिए महोदय ने सीधे जवाब देने के बजाय ‘बिहार और लालू यादव’ की उपमा देकर ऐसा कुतर्क गढ़ा कि तर्क भी शर्मिंदा हो जाए! आज मजे की बात देखिए… वही बुद्धिजीवी महोदय आज ममता बनर्जी की डूबती नाव छोड़कर, पूरी बेशर्मी से भाजपा के पाले में बैठे नजर आ रहे हैं। इसे ही कहते हैं वैचारिक छलावा!

बहरहाल, अवसरवादियों की बात छोड़ें तो असल हकीकत यह है कि अब भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा में सत्ता संभालने जा रही है! यह एक ऐतिहासिक बदलाव है, लेकिन इसके साथ ही उम्मीदों का भारी दबाव भी है।

अब तक विपक्ष में रहते हुए बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा, जनसांख्यिकी बदलाव और बड़े पैमाने पर हो रही अवैध घुसपैठ जैसे गंभीर मुद्दों पर भाजपा जो विवशता गिनाती थी, वह अब नहीं चलेगी। अब किसी भी तरह के भाजपाई कुतर्क या बहानेबाजी के लिए कोई जगह नहीं बची है।

जनता ने जिस विश्वास के साथ बदलाव किया है, अब उसकी कीमत चुकानी होगी। अब आरोप-प्रत्यारोप का समय खत्म हुआ; अब तो नई सरकार को हर हाल में ‘रिजल्ट’ देने ही होंगे! देखते हैं कि सत्ता का यह नया अध्याय बंगाल के मूल निवासियों के लिए कितना सुरक्षित और न्यायपूर्ण साबित होता है।

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NewYorkerBihari

देव बाबा के चिट्ठे पर आपका स्वागत है। हिन्दी ब्लॉगरी में पिछले लगभग दो अढाई दशक से किसी न किसी तरीके से जुड़ा रहा हूँ। बीच बीच में ब्रेक भी लिए हैं लेकिन ब्लॉगरी कभी छूटी नहीं.. इस बीच ब्लॉग का पता जरूर बदल गया है लेकिन याद रहे आदमी पुराना है! दुनिया के इस कोने से लेकर उस कोने तक, हम किसी भी विषय पर टिप्पणी कर सकते हैं! और हाँ, हमसे संपर्क करने के लिए केवल चाय ऑफर कीजिए, हम प्रकट हो जाएँगे।

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