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Continue reading →: भद्रलोक के पाखण्डी बुद्धिजीवी!
लोकतंत्र में नायक बदलते रहते हैं, और नायकों के सत्ता से उतरते ही सबसे तेजी से बदलते हैं हमारे समाज के स्वघोषित “बुद्धिजीवियों” के सुर। पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों अवसरवादिता और बौद्धिक पाखंड का सबसे सटीक उदाहरण बनी हुई है। याद कीजिए पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजे! जब…
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Continue reading →: व्यापारिक समझौतों का सप्ताह!इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की परिभाषा बदल रही है। पारंपरिक रूप से ‘व्यापार’ और ‘रणनीति’ को अलग-अलग देखा जाता था, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ‘जियो-इकोनॉमिक्स’ (Geo-economics) ही विदेश नीति का केंद्र बन गया है। भारत द्वारा अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ किए जा रहे नवीनतम समझौते केवल आयात-निर्यात के आंकड़े नहीं हैं; ये…
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Continue reading →: बसंत पंचमी: बदलाव और ज्ञान का प्रतीकदो दिन में बसन्त पञ्चमी है, अहा, सुन्दर और अच्छे दिन आने वाले हैं। प्रकृति अपनी पीली चादर ओढ़ती है और ठिठुरती हुई सर्दियों के बाद धूप में एक नई गरमाहट घुलने लगती है, तब हम बसंत पंचमी मनाते हैं। आम तौर पर हम इसे ‘ऋतुराज बसंत’ के आगमन और…
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Continue reading →: गीता, कर्मयोग और कॉर्पोरेट लाइफश्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग का सिद्धांत कहता है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं (कर्मण्येवाधिकारस्तेमाफलेषुकदाचन). आज के आधुनिक युग में यदि हम इस सिद्धांत की कसौटी पर मनुष्य की स्थिति का विश्लेषण करें, तो हमें एक गहरा द्वंद्व दिखाई देता है। कल एक अजीब विरोधाभास सुनने…
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Continue reading →: स्थिरचित्त कैसे बनें – प्रथम प्रवचन
अयोध्या की सुबह थी। सूर्य की पहली किरणें महल की दीवारों पर पड़ रही थीं, पर भीतर कई हृदयों में अंधकार छाया था। राम के वनगमन का निर्णय पूरे राजमहल को जैसे भीतर से हिला चुका था। लेकिन संसार में सबसे बड़े वीर, जो सम्राट बनने जा रहे थे, वह…
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Continue reading →: मकर संक्रांति: भारतीय सांस्कृतिक एकता का महाकुंभमकर संस्कृति, खगोलीय, भारतीय सभ्यता और संस्कृति
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Continue reading →: हिंदू धर्म में स्वास्थ्य और चिकित्सा: एक समग्र दृष्टिकोण
हिंदू धर्म में ‘आरोग्य’ (स्वास्थ्य) को केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच का संतुलन माना गया है। आयुर्वेद: जीवन का विज्ञान आयुर्वेद को दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणाली माना जाता है, जिसकी उत्पत्ति अथर्ववेद से हुई है। योग और प्राणायाम योग केवल व्यायाम…
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Continue reading →: अतिवृष्टि, भूकंप…पिछला सप्ताह विचित्र बीता। चार दिन भयंकर आंधी, पानी ने सब कुछ अस्तव्यस्त कर दिया था। बरसात से पेड़ गिरने के कारण टाउनशिप के कई घर घंटों बिना बिजली के थे। न्यूनतम तापमान अब भी लगभग हिमांक के आसपास है सो बिना बिजली जनजीवन अस्तव्यस्त हो जाता है। ऐसे में…
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Continue reading →: लोहे का घर का एक दिन: (न्युयॉर्कर बिहारी)
आज लोहे के घर में मेरे सामने की सीट पर दो भारतीय बैठे हैं, उनमें से एक यहीं बसा हुआ है और दूसरा अभी कुछ समय पहले ही आया है। अजय भैया लिखे थे कि हमारी पीढ़ी वाला आदमी कहीं भी रहे, उसके दिल दिमाग का एक हिस्सा जहाँ रह…
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Continue reading →: क्या स्वामी नारायण मंदिर, हिंदू मंदिर हैं?
यह एक अजीब प्रश्न है, क्योंकि देश के बाहर हिन्दू धर्म के सबसे बड़े ध्वजवाहक स्वामी नारायण संप्रदाय के बड़े बड़े मंदिर हिन्दूधर्म के सहिष्णु, सर्वसमावेशी होने के हस्ताक्षर के समान हैं। सनातन हिन्दू धर्म में सदैव अनेक मत और सम्प्रदाय रहे हैं और ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 164वें…
