हिंदू धर्म में ‘आरोग्य’ (स्वास्थ्य) को केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच का संतुलन माना गया है।
आयुर्वेद: जीवन का विज्ञान
आयुर्वेद को दुनिया की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणाली माना जाता है, जिसकी उत्पत्ति अथर्ववेद से हुई है।
- त्रिदोष सिद्धांत: आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर वात, पित्त और कफ से बना है। जब इन तीनों में असंतुलन होता है, तो रोग उत्पन्न होते हैं।
- पंचकर्म: यह शरीर के शुद्धिकरण (Detoxification) की एक प्रक्रिया है जिसमें मालिश, वाष्प स्नान और अन्य विधियों से शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकाला जाता है।
- आहार ही औषधि है: हिंदू दर्शन में ‘सात्विक आहार’ (ताज़ा और शुद्ध भोजन) को मानसिक शांति और शारीरिक शक्ति का मुख्य स्रोत माना गया है।
योग और प्राणायाम
योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि ऊर्जा के संचार की एक पद्धति है।
- आसन: विभिन्न शारीरिक मुद्राएं अंगों की कार्यक्षमता बढ़ाती हैं।
- प्राणायाम: ‘प्राण’ यानी जीवन शक्ति। श्वास नियंत्रण के माध्यम से हम अपने भीतर की प्राण ऊर्जा को संतुलित करते हैं, जिससे तनाव और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां दूर होती हैं।
मंत्र और ध्वनि
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, पूरा ब्रह्मांड ध्वनि की तरंगों से बना है।
- महामृत्युंजय मंत्र: भगवान शिव को समर्पित यह मंत्र गंभीर रोगों से मुक्ति और मानसिक शक्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
- बीज मंत्र: “ॐ” (ओम्) और अन्य विशिष्ट ध्वनियाँ शरीर के ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को जागृत करती हैं और मानसिक विकारों को दूर करती हैं।
हस्त मुद्राएं और चक्र
हमारे हाथ की पाँच उंगलियाँ पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतिनिधित्व करती हैं।
- मुद्रा: उंगलियों के विभिन्न स्पर्शों से ऊर्जा के प्रवाह को बदला जा सकता है, जैसे ‘ज्ञान मुद्रा’ मानसिक एकाग्रता के लिए और ‘प्राण मुद्रा’ जीवन शक्ति बढ़ाने के लिए।
- चक्र: शरीर में सात मुख्य ऊर्जा केंद्र होते हैं। ध्यान और ध्यान के माध्यम से इन चक्रों को संतुलित करना आध्यात्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य माना गया है।
अनुष्ठान और आध्यात्मिक
- यज्ञ और हवन: हवन में जलाई जाने वाली औषधीय लकड़ियां और सामग्री वातावरण को शुद्ध करती हैं और श्वसन स्वास्थ्य में सुधार करती हैं।
- विभूति और तिलक: माथे पर विभूति (भस्म) या चंदन लगाना एकाग्रता और तंत्रिका तंत्र को शांत करने का प्रतीक है।
हिंदू चिकित्सा पद्धति का मूल मंत्र है: “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” (अर्थात: सभी सुखी हों, सभी रोगमुक्त हों)। यह दृष्टिकोण हमें सिखाता है कि पूर्ण स्वास्थ्य पाने के लिए प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना और अपने भीतर की चेतना से जुड़ना आवश्यक है।


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