पिछला सप्ताह विचित्र बीता। चार दिन भयंकर आंधी, पानी ने सब कुछ अस्तव्यस्त कर दिया था। बरसात से पेड़ गिरने के कारण टाउनशिप के कई घर घंटों बिना बिजली के थे। न्यूनतम तापमान अब भी लगभग हिमांक के आसपास है सो बिना बिजली जनजीवन अस्तव्यस्त हो जाता है। ऐसे में भी स्कूल, ऑफिस सब सामान्य रूप से चलते रहे। बाढ़ के खतरे के बाद भी कोई दुर्घटना नहीं हुई और मुसीबत टल गई। मैंने इस प्रकार का मौसम या इससे भी खराब मौसम देखा है लेकिन पता नहीं क्यों इस बार मन बहुत आशंकित था। कल आए भूकंप ने तो बहुत ही डरा दिया था।
ग्रामीण और शहरी अमेरिका के बीच का अंतर यहां बिजली के खंभे की क्वालिटी से पता चल जाता है। जहाँ एक तरफ चकाचौंध, बड़ी बड़ी स्क्रीन और जगमग लाइटों से चमकता टाइम्स स्क्वायर है तो दूसरी तरफ लकड़ी के खंभों पर ग्रामीण अमेरिका के बिजली, टेलीफोन और इंटरनेट की लाइनों को संभालने की जिम्मेदारी है। यह पुराने खंभे जर्जर हो चले हैं और खराब मौसम की मार को नहीं सह पाते। पिछले सप्ताह हमारे टाउनशिप में तीन पोल गिरे और असंख्य पेड़ गिरे। इस कारण लगभग साढे चार सौ घर बिना बिजली के थे।

अगला सप्ताह पूर्ण सूर्यग्रहण से शुरू होगा, यह हमारे जीवनकाल का दूसरा पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। इसके पहले 1995 की दीवाली के दिन खग्रास सूर्यग्रहण के साक्षी रहे हैं। स्कूल ने अलग से दिशा निर्देश जारी किए हैं। बच्चों के लिए यह नया अनुभव होगा।
देखते हैं क्या होता है। ग्रहण काल में अपने अनुशासन होते हैं, मंदिरों में उस समय पूजा हवन आयोजित हुए हैं। सर्वसाधारण की मंगल कामना के साथ होने वाले अनुष्ठान उत्तम फल देते हैं। आशा है सब मंगल ही होगा। सर्वे भवन्तु सुखिनः 🙏🙏


Leave a comment