वर्ष 2023 के अंतिम “मन की बात” कार्यक्रम में प्रधानमंत्रीजी मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बोले। बीच में सद्गुरू महाराज भी आए और उन्होंने इस स्थिति के निवारण हेतु यौगिक साइंस की बात भी की। प्रधानमंत्रीजी ने ऐसे विषय को छुआ जिस पर आम तौर पर भारतीय समाज में कोई खुली बहस नहीं हुआ करती।मुझे लगता है, फास्ट फॉरवर्ड और खतरनाक स्तर तक संवेदनहीन और यान्त्रिक हो चला समाज मानसिक स्वास्थ्य की अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। शायद नब्बे प्रतिशत युवा किसी न किसी अवसाद से ग्रसित हैं या एक छोटी सी हलचल उन्हें विचलित और अस्थिर कर सकती है। यान्त्रिक हो चले जीवन में लोगों की भावनाएँ भी यान्त्रिक हैं। सब अपने अपने अवसाद से ग्रसित हैं, किसी के पास फ़ुरसत कहाँ है? अवसाद ग्रस्त जीवन के भी कई कारक हैं – तनाव ग्रस्त जीवन, स्वास्थ्य, परिवार की स्थिति, अनियमित दिनचर्या, सामाजिक और आर्थिक स्थिति। मनुष्य की मानसिक स्थिति उसके अकाउंट के बैलेंस और उस पर लदे कर्ज के अंतर पर भी निर्भर करती है। लोगों के आपसी सम्बन्ध टूट रहे हैं, धैर्य और विवेक के अभाव और हद्द से ज़्यादा तकनीक पर निर्भरता में इसमें आग में घी का काम ही किया है। इस स्थिति से निवारण क्या है?
सरल जीवन: जिसको आजकल के विद्वान मिनिमलिज्म भी कह रहे हैं और हमारे शास्त्रों में जिसे मितव्ययी कहा गया है। यहाँ जीवन की दिनचर्या को बनाए रखने के लिए जिस वस्तु की आवश्यकता है उसके अलावा हर वस्तु को हटाइए। घर को व्यवस्थित(declutter) कीजिए। जिस घर में बेकार का सामान इधर उधर फैला रहे, वहाँ शांति का अनुभव नहीं हो सकता। बेकार के सामान घर में मत खरीदिये, सरल और सहज स्वभाव रखिए। मानव सम्बंधों में अपने हिस्से की ईमानदारी रखिए और किसी के सामने अन्य लोगों की या ख़ुद की स्थिति की आलोचना करना बंद कर दीजिए। जीवन में आपका परिवार और आपके असली मित्र ही आपके अपने हैं, उन्हें समय दें। अजनबियों को प्रभावित करने के लिए दिखावा करना बंद कीजिए। पुस्तकों को अपना मित्र बनाइये। यक़ीन मानिए सिर्फ़ इतना मात्र करने से आप नब्बे प्रतिशत मानसिक समस्याओं से निबट लेंगे।
भक्ति मार्ग: क्या आपके जीवन में ऐसा एक भी व्यक्ति है जिसकी बात आप बिना कोई तर्क/कुतर्क के मान लें? भले वह व्यक्ति माता, पिता, गुरु, मित्र, पति/पत्नी या सम्बन्धी कोई भी हो। यदि ऐसा है तो इस मार्ग पर चलना आपके लिए सम्भव है। यदि आप किसी की भी नहीं सुनते, तो यह मार्ग आपके लिए कठिन है। मैंने इसलिए कहा क्योंकि मनुष्य को भक्तिमार्ग पर चलने के लिए जिस समर्पण भाव की आवश्यकता है उसे सिखाना कठिन है। हाँ, लेकिन नियम और अनुशासन से सब कुछ सम्भव है – अपने घर का एक कोना निश्चित करें, उसे साफ़ रखें, वहाँ नहा धोकर रोजाना कुछ समय एकाग्रचित्त होकर शांति से बैठें। रोजाना ध्यान योग और प्राणायाम करें। हो सके तो रोज़ एक ही समय का अनुशासन रखें। मानसपाठ, हनुमान चालीसा पाठ से भी लाभ ही होगा। चित्त की स्थिरता के लिए ध्यान और योग का मार्ग ही उत्तम मार्ग है।
सामाजिक चेतना: समाज की चेतना सुषुप्त होती है और सामान्य मनुष्यों के लिए सुख के साधन देने वाला ही श्रेष्ठ श्रेयस्कर होता है। जिस प्रकार बरसात ख़त्म होने के बाद छतरियाँ बोझ बन जाती हैं सो अधिकतर लोग किसी की कमजोर मनोस्थिति होने पर उसे सहारा देने के स्थान पर अकेले छोड़ देते हैं। आज मुझे इस बात को मानने में कोई संकोच नहीं है कि पिछले कुछ वर्ष मेरे लिए अवसादों से भरे रहे हैं। पिछले चार पाँच सालों से अपने स्वास्थ्य की स्थिति से जूझते हुए फिर अपने बालक के स्वास्थ्य और अस्पतालों के चक्कर लगाते हुए मैं विचित्र मनोस्थिति में रहा हूँ।इस दौरान मेरे सुख के साथी मित्रों का सहयोग नगण्य ही रहा। कठिन स्थिति में परिवार और कुछ मित्र ही काम आते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय को उठाया तो उम्मीद है लोग अब इसके ऊपर विमर्श करेंगे। यूरोपियन देशों, अमेरिका कनाडा इत्यादि देशों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए हेल्पलाइन नंबर होते हैं। कुछ वैसा ही भारत में भी संभव होना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति कोई मजाक या चुटकुला नहीं है, यह एक गंभीर समस्या है। जहाँ संभव हो अपने मित्रों का सहयोग लें और सहयोग करें।
॥हरि ओऽम्॥


Leave a comment